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क्योंकि रेप अपने आप में ही क्रूरता की सारी हदें पार कर रहा है !

सभ्य समाज से प्रश्न है कि रेप या यौन हिंसा आखिर है क्या ? क्या ये समाज की जननी अर्थात स्त्री पर हावी होने की प्रवृत्ति मात्र है ? या फिर पुरुष का खुद के बड़ा, असरदार होने का अक्षम्य दंभ ? या फिर औरत को संपत्ति समझने की भूल ? आखिर कैसे हमारा कानून […]

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समरथ को नहीं दोष गुसाईं !

देश के मौजूदा परिदृश्य में उक्त पंक्ति का अर्थ है मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी . अतः देखिए इस ब्लॉग को और विचार कीजिये की हम हमारा देश कहाँ जारहा है……आखिर विकास क्यों लाकुग्रस्त प्रतीत हो रहा है. स्वयं से प्रश्न कीजिये की हमने वोट किसी भावना में बाह कर […]

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आमिर खान साहब “कुर्बानी की सार्थकता” समझिये…

कई दिनों से देश की भिन्न मीडिया में बकरे की कुर्बानी का ज़िक्र हो रहा है, जिसकी सार्थकता पर बार बार सवाल उठ रहे हैं. अत: इसकी सार्थकता हेतु ३ मुख्य बिन्दुओं पर मैं ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ . १ -: बायोकेमिस्ट्री का मानना है कि हमारे शरीर में २० प्रकार के अमीनो एसिड […]

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ना बापू हैं, ना ही जनता में समझ, ……तो नेताओं का स्वार्थ क्या यूँ ही हिंसा जारी रखेगा ?

जवाब पर जवाब देते रहने की संकल्पना से हिंसा की चिंगारी ज्वालामुखी की ही रचना करती है, तभी तो सब्जरंग से सजा धजा समाज इस कदर भस्म होजाता है किउसकी राख भी खाक हो जाती है , ताकि असामाजिकता की आत्मा को शांत रखने हेतु उस राख को नदी की धरा में प्रवाहित कर समाज […]

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दलित राजनीति अभी जारी है !

पिछले १ महीने से उत्तरप्रदेश का सहारनपुर का अमन-चैन दो समुदायों एवं जातीय संघर्ष का शिकार बना हुआ है. २० अप्रैल को सांसद राघव लखन पाल के नेतृत्व में भाजपा समर्थकों की रैली मुस्लिम बहुल क्षेत्र में निकलती है और देखते ही देखते राघव समर्थक और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प होजाती है. तो दूसरी […]

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बसपा बहुमत के करीब पहुँचती दिखाई देरही है !

देशवासी बखूबी वाकिफ हैं की 543 लोकसभा सीटों की राजनितिक जमीन हेतु उत्तरप्रदेश की 403 विधान सभा सीटों का महत्त्व आखिर है क्या ? क्या वाकई उत्तरप्रदेश की फतह भविष्य में केंद्र की सत्ता प्राप्त करने हेतु बुनियादी ज़मीन तैयार करती है ? दो राष्ट्रिय पार्टी में कांग्रेस क्यों कई दशक से वजूद की तलाश […]

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तलाक…तलाक…तलाक… ?

एक तरफ से आवाज उठती है कि “साफ़ कह दे गिला कोई अगर है फैसला फासले से बेहतर है…..” तो दूसरी तरफ से जवाब भी आता है कि “तलाक दे तो रहे हो गुरूर-ओ-कहर के साथ मेरा शबाब भी लौट दो मेरे महर के साथ…” आधुनिक युग में मुस्लमान जोड़ा गिला, शिकवा के अंतर्द्वंद में […]

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UP विधान सभा चुनाव २०१७- साख की जंग हाथी और साइकिल में, पंजा वजूद तो कमल ठौर की तलाश में.

देश बखूबी वाकिफ है कि ५४३ लोकसभा सीटों की राजनीति में ४०३ विधान सभा सीटों का महत्त्व क्या है. जी हाँ ज़िक्र ४०३ विधान सभा सीटों से सजे उत्तरप्रदेश का का किया जारहा है, जिसका प्रभाव हमेशा हमेशा से ५४३ सीटों की मालिक केंद्र सरकार की राजनितिक स्थिरता हेतु उल्लेखनीय रहा है, शायद इसी लिए […]

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गांधीजी, तो अब ! ऐसा देश है मेरा ?

             देश की राजधानी दिल्ली का जाएज़ लीजिये, सड़क कम गाड़ियां ज्यादा, कंक्रीट की सड़कों पर गाड़ियों का जंगल बेहयाई से उगा जा रहा है. अगर आप इस हुजूम में फंस गये तो क्या रात क्या दिन, ज़िंदगी बसर सड़क पर ही होती प्रतीत हो रही है, या फिर लाखो […]

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क्यों? सिस्टम भ्रष्ट नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के लिये ही सिस्टम है ?

       याद कीजिये भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन को और सोचिये क्या वाकई राजनीति में पहुँच बनाते हुए सत्ता हासिल कर क्या सिस्टम बदला जा सकता है. क्योकि दिल्ली में लोकपाल के सवाल को हाशिये पर रख कर, दिल्ली के ही दस विधायक ऐसे जो सत्ता पाने के बरस भर के भीतर दागी […]

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