जागो जनता जागो

बड़ी मुश्किल से भारतीय मुस्लमान हज के लिए मक्का मदीना जा पते है. आखिर क्यों ??????
भारतीय मुस्लिमों में सर्वाधिक हाजी रिटायरमेंट के बाद हज करते है. आखिर क्यों ???????
९९ % हाजी जीवन में सिर्फ एक बार ही हज कर पते है. आखिर क्यों ???????
ऐसे न जाने कितने प्रश्न उठते है, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं, लेकिन सिर्फ जवाब से होगा क्या ???? जी उपरोक्त सभी सवालो के जवाब एक ही शब्द पर ठहरते है की माली हालत कैसी है ? जब माली हालत बेहतर होगी तब लोग युवा अवस्था में ही हज कर लेंगे, दूसरी तरफ अगर माली हालत ठीक होगी तब लोग १ से अधिक बार हज कर सकते है. लेकिन बर्डी मुश्किल तब होती है हब बड़ी हसरत से लिए एक अधेड़ उम्र का बाप जो किसी बुज़ुर्ग की औलाद भी हो सकता है, एक पति भी ; पाई पाई जोड़ बच्चों की परवरिश करता है, बुज़ुर्ग वालदैन की बीमारी का इलाज भी उसे ही करना है, बेटी की शादी भी उसे ही करवानी है, भविष्य के लिए घर भी बनाना है, बूढ़ापे के लिए कुछ जमा भी करना है . अब इन खर्चों के अलावा अगर और कुछ जमा कर लिया तब कही हज मुमकिन हो पता है.
इन हालातो से रूबरू पुरे देश के मुस्लमान है. म्हणत मशक़्क़त के बाद हज की तैयारी शरू होती है. सरकार का बड़ा सहयोग भी मिलता रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालो पे अगर नज़र डली जाए तो समझ नहीं आता कि सब्सिडी के नाम से कही हाजियो को भी ठगा तो नहीं जारहा है ???? ये कोई NDA सरकार के दौर की बात नहीं ये तो UPA के दौर का भी वही मंज़र है. सरकार बदल गई लेकिन हालत वेसे ही है. अब सवाल ये उठता है की कुछ गड़बड़ तो नहीं???
एक नज़र गणित पर डालते है ——-
फिलहाल मक्का शरीफ से इंडिया के लिये हाजियों का कोटा एक लाख छत्तीस हज़ार (1,36,000) का है ।
पिछले साल हमारी गवर्नमेंट ने सालाना बजट में 691 करोड़ हज सब्सिडी के तौर पर मंज़ूर किये थे ।
691 करोड़ ÷ 1.36 lakh = 50.8 हज़ार
यानी एक हाजी के लिए 50000 रुपये ।।
◀ अब ज़रा खर्च जोड़ लेते हैं ▶
एक हाजी को हज के लिए गवर्नमेंट को एक लाख अस्सी हज़ार (1,80,000) देने पड़ते हैं ।
जिसमे चौतीस हज़ार (34,000) लगभग 2100 रियाल मक्का पहुँचने के बाद खर्च के लिए वापस मिलतें हैं ।
1.8 लाख – 34000 = 1.46 लाख
यानि हमें हमारी गवर्नमेंट को एक लाख छियालीस हज़ार (1,46,000) रुपये अदा करने पडतें हैं ।।
मुम्बई से जद्दाह रिटर्न टिकट 2 महीने पहले बुक करतें हैं तो कुछ फ्लाइट का किराया 25000 रुपये से भी कम होगा । फिर भी 25000 रुपये मान लेतें हैं । (irctc पर चेक कर लीजिये)
खाना टैक्सी/बस का बंदोबस्त हाजियों को अलग से अपनी जेब से करना होता है ।
गवर्नमेंट को अदा किये एक लाख छियालीस हज़ार रुपये (1,46,000) में से होने वाला खर्च ___
फ्लाइट = 25,000
मक्का में रहना(25दिन) = 50,000
मदीना में रहना(15दिन) = 20,000
अन्य खर्चे = 25,000
कुल खर्च हुआ =1,20,000
कन्फ्यूज़न ?????????
मतलब एक हाजी से लिये 1,46,000 रुपये और खर्च आया 1,20,000 रुपये मतलब एक हाजी अपनी जेब से गवर्नमेंट 26,000 देता है ।
अब असल मुद्दा ये है की जब हाजी सारा रुपया अपनी जेब से खर्च करता है और उसके ऊपर भी 26,000 रुपये और गवर्नमेंट के पास चला जाता है ।
मतलब लगभग एक है से सब्सिडी मिला कर गवर्नमेंट के पास 76,000 हज़ार हो जाता है तो ये पैसा जाता कहाँ है ।।
26,000+50,000 × 1,36,000= 10,33,60,00,000 (दस अरब तेतीस करोड़ साठ लाख रुपया)
यही नहीं , हज यात्रा हेतु ली जाने वाली राशि यात्रा से ५ महीने पहले से जमा करवाई जाती है, तब कुल राशि ( १८०००० क्ष १३६००० = 24480000000) अर्थात २४४८ करोड़ रुपये का इंट्रेस्ट कहा जाता है ?????????
जनता जगे कि तब सवाल पूछेगी , लेकिन जागो जनता जागो , कही आईपीएल कि तरह कोई और ललित मोदी हज के पैसे लेकर ब्रिटेन या विश्व के अन्य मुल्कों में ऐश न करने लगे