त से तल्खी , त से तेवर ……फिर महांगठबंधन में त से तलाक क्यों ….???

बड़े अरमानों से महांगठबंधन की आधार शिला सेकुलरिज़्म कि ज़रूरत को बताते हुए मोदी रथ को रोकने हेतु रखी थी कद्दावर मुलायम, सुशासन बाबू और सैफई के समधी लालू ने, लेकिन, सेकुलरिज़्म के तमगे से सजा महांगठबंधन क्लाइमेक्स से पहले ही टूट गया . टूटने का दाग लगा लालू नितीश के सर , सपा प्रवक्ता रामगोपाल यादव ने कहा कि गठबंधन धर्म नहीं निभाया गया . उनके तेवर में त से तल्खी साफ दिखी शायद इसी लिए सियासी तलाक भी इतनी जल्द होगया .

अभी तो कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन, तीन कारण साफ नज़र आते हैं. पहला तो ये कि जिस कांग्रेस से दो दो हाथ करने के लिए कभी जनता दल का फूल खिला था आज उसी कांग्रेस से नितीश बाबू की नज़दीकियां सपा को खटक रही हैं. हाल तो ये हैं कि जिस मोदी रथ को रोकने के लिए जनता परिवार बनाया जा रहा था, दूरगामी परिणाम ( लाभ/हानि ) पर नज़र जमाए नेता जी यानि मुलायम सिंह यादव ने अलग होने में ही भलाई समझी. लाभ की बात हैं तो नेता जी अगर सपा को अकेले या दूसरे छोटे दलों की मदद से बिहार चुनाव में जीत के बाद कुछ भी विधायक अपनी पार्टी या सामान दलों की मदद से बना लेते हैं तो समझ लीजिए की आने वाले दिनों के लिए बिहार से राज्य सभा के लिए सपा की ज़मीन तैयार कर पाएंगे, जो लालू नितीश के साथ मिल कर करना थोड़ा मुश्किल होता. शायद ये दूसरा कारण हो.

उत्तर प्रदेश में सपा हैं, केंद्र में राजग है, २०१७ में विधान सभा चुनाओ हैं . सारी बातों को ध्यान में रख कर नेता जी ने दूर की कौड़ी खेली है, उत्तर प्रदेश को विकास हेतु केंद्र का साथ चाहिए और २०१७ चुनाव के लिए सपा को ज़मीन तैयार करनी है, अब इन हालातों में राजग से बैर कहीं ज़्यादा महंगा पर सकता था , इस लिए स्पा सुप्रीमो ने देर किआ बिना अलगाओ का बिगहुल बजाय . शायद ये तीसरा कारण था.

लेकिन, सपा ने अलगाओ के लिए जो कारण गिनाए वह भी सोचने वाले है. सपा प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव के लिए ५ सीटें तय की गईं सपा के खाते में, हमें पता चला मिडिया द्वारा, जिससे बिहार कार्यकरता असहमत थे , उनके सम्मान के लिए नेता जी की अध्यक्षता में सपा ने महांगठबंधन से अलग होने का फैसला लेते हुए तय किया कि सपा सम्मानजनक तरीके से अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी . अब सवाल ये उठता है कि पिछले चुनाव में ०.५% वोट पाने वाली सपा इतनी नासमझ तो है नहीं कि अपने अस्तित्वहीन क्षेत्र में इतनी बड़ी खटास गले लगाएगी ???
सीधा लाभ किसको ??? जी हाँ भाजपा को सीधा लाभ होना तय है. हो भी क्यों नहीं महांगठबंधन अब महालठबंधन में परिवर्तित होता जारहा है. किसी ने सच कहा है जिस ने समय कि चल को पढ़ लिए उसने सारा जहाँ जीत लिया. अब ये जहाँ किस की झोली में जाएगा ये तो समय ही बताएगा ?????? .