न भाजपा मासूम है, न ही कांग्रेस आलाकमान, फिर सनसद सत्र की बेअदबी क्यों ?

सत्ता या विपक्ष किसी भी दल की राजनितिक हस्तियों पर हमला हो और वह प्रतिकार में राजनीति न करे, ऐसा तो कभी हुआ नहीं l सैकड़ों बार राज्यों में हुई घटनाओं की वजह से संसद ही बाधित होती ऐ है l ऐसा मालूम होता है की संसद सिर्फ कानून बनाने , बहस करने और सरकार की जवाबदेही तय करने का ही मंच नहीं, बल्कि संसद तो अब सर्वोच्च वैधानिक मंच बन गया है. कभी भाजपा विपक्ष की बानगी थी, आज कांग्रेस है l कल कांग्रेस सत्ता की डोर थामे संसद सत्र बाधित होने की दुहाई देती थी, आज कमोबेश भाजपा का भी यही हाल है l
                   कभी जिस राजनितिक पराक्रम से पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस की की ताबूत घोटाला के मामले हेतु फजीहत हुई, उसी अंदाज़ में राजीव गांधी पर भी बोफोर्स मामले पर कीचड़ उछले गए l हाल के पिछले संसद सत्र में उसी तर्ज़ पर वसुंधरा राजे, सुधमा स्वराज या फिर व्यापम के लिए म0प० मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर कांग्रेस की तरफ से उँगलियाँ उठीं l अब इस सिलसिले की अगली कड़ी में नेशनल हेराल्ड का नाम जुड़ा l इस बार आरोप लगे राहुल एवं सोनिया पर, जो कभी खुद आरोप लगाने की कमान संभालते थे l इन सारी घटनाओं की बली चढ़ा संसद सत्र और प्रतीक्षित विधेयक जो पारित नहीं हो पा रहे हैं l
                  हमारे देश की ये कैसी विडंबना है कि जो दल सत्तासीन होता है उसके नेताओं की कोई भी हरकतें उस दौर में नाजायज़ नहीं होतीं, इसे देश का अघोषित विधान ही कहा जाएगा कि सत्तासीन दल विपक्षी नेताओं को ‘ देख लेते हैं की जुगत में ‘ लगे होते हैं तो वहीं विपक्षी भी सत्ता आते ही हिसाब बराबर करने की जुगत में लग जाते हैं.
                       आज के हालत पर नज़र डाली जाए तो ये मानाजा सकता है कि संसद को बाधित  कर नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस पार्टी जिस अंदाज़ में प्रतिक्रिया कर रही है इस प्रकार संसद का बाधित होना ठीक नहीं l लेकिन, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर उंगली उठना और अदालत के अंतिम फैसले तक का इंतज़ार इस कड़ी की सियासी रंजिश को तब तक जारी रखेगी जबतक कि कोई नया मुद्दा न उठे.
                       इधर सुब्रमण्यम स्वामी का गांधी बैर सदा की भांति जारी है. याद कीजिये ये वही स्वामी जी हैं जिन्हों ने मनमोहन सरकार के दौर में नेशनल हेराल्ड को कोर्ट तक पहुँचाया था l ED यानी प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच की थी, लेकिन उस दौर के  ED निदेशक ने इसे बेजान पाकर बंद कर दिया था l ये स्वामी जी की ही भक्ति है कि मोदी सरकार के दौर के आते ही नेशनल हेराल्ड के जिन को बाहर निकलने का मौक़ा फिर मिला, तो वहीं ED के नए निदेशक ने पहले की बेजान बताई जा रही फाइल में जान होने की पड़ताल में लग गए ।
                       सवाल ये उठता है कि सोनिया और राहुल का दामन बेदाग़ है तो कांग्रेस उसे अदालत में सिद्ध करे, न कि अपनी खिसयाहट से अपने शीर्ष नेतृत्व के संकट को उजागर करे । उधर कपिल सिब्बल अदालत में आला कमान का बचाव करते हुए कहते हैं भाजपा एक वर्ष से सिर्फ कांग्रेस के नेताओं को निशाना बना रही है, भाजपा राजनितिक द्वेष से काम कर रही है ।
                         बाहरहाल, संसद का जो हाल है कहीं GST विधेयक एक बार फिर न अटक जाए । शीतकालीन सत्र २३ दिसंबर तक है तो १९ दिसंबर को सोनिया राहुल की कोर्ट में पेशी है । अब १९ दिसंबर से पहले GST विधेयक का पारित होना मुश्किल है तो वहीँ १९ से २३ दिसंबर के बीच राहुल सोनिया के पेशी की गहमा गहमीं के प्रभाव से GST विधेयक उबर पाएगा या फिर अगले सत्र की प्रतीक्षा जारी रहेगी ?