पंजाब हमला भारत के भरोसे पर ‘नापाक खंजर’, रिश्तों पर आघात नहीं तो क्या है ?

                    छह महीने में दूसरी बार बड़े आतंकी हमले को झेलने वाला पंजाब ,वहां के एक जिले के एसपी की गाड़ी एसपी सहित छीन ली जाती है. गाड़ी छीनने वाले कथित तौर पर सेना की वर्दी में होते हैं, वारदात अंजाम होने के कुछ घंटों बाद एयरफोर्स स्टेशन से करीब आधा किलोमीटर दूर आतंकी गाड़ी को छोड़ कर चले जाते हैं. इसके बाद अलर्ट जारी होता है और अचानक एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमला हो जाता है. इस दफा खुफिया एजेंसियों ने अपनी भूमिका पहले से बेहतर निभाई, लेकिन, सुरक्षा व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों पर सवाल उठेंगे. हाथों में हथियार लेकर आतंकी पैदल ही एयरफोर्स की दीवार फांद कर अंदर कैसे घुस गए. किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई कि आतंकी कहां गुम हो गए और उन्होंने फायरिंग भी शुरू कर दी. पंजाब पुलिस की ये कैसी सतर्कता है कि हमले के बाद रास्तों के किनारे पड़े पत्थरों को उठाकर बैरिकेट लगाए गए थे. पुलिस पत्थरों को उठाने और हटाने में लगी थी. आतंकियों के पास आधुनिक हथियार हैं और पुलिस अभी भी ‘स्टोन एज’ में जी रही है.
पठानकोट में हुए आतंकी हमले से कारगिल घुसपैठ की याद ताज़ा होना स्वाभाविक है, याद कीजिये अटल जी की लाहौर यात्रा के ठीक बाद कारगिल घुसपैठ जिस अंदाज़ में हुई उसी अंदाज़ में मोदी जी की पाक यात्रा के ठीक बाद पंजाब हमला भारत के भरोसे पर ‘नापाक खंजर’ रिश्तों पर आघात नहीं तो क्या है. नवाज़ शरीफ के लिए ये दुर्योग ही तो है कि अटल जी की लाहौर यात्रा एवं कारगिल घुसपैठ के समय पाक के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ थे तो मोदी जी की पाक यात्रा और पंजाब हमले के समय भी वही प्रधानमंत्री हैं. तो क्या एक बार फिर नवाज़ शरीफ कमज़ोर, बेबस और लाचार प्रधानमंत्री साबित होरहे हैं ?
अब प्रश्न उठता है कि जिस प्रकार कारगिल के बाद पाक से संवाद- सम्पर्क को तोड़ दिया गया था क्या उसी तरह अब नवाज़ सरकार से फिर एक बार रिश्ते टूटेंगे या फिर मोदी जी द्वारा आरम्भ किये गए पाक वार्ता के सिलसिले को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार नवाज़ सरकार के समक्ष एक चुनावती भरा मौका देगी ?

                        नया वर्ष ज़रूर है, लेकिन सालों पुराना हमारा दर्द नए वर्ष की शरुआत में फिर ताज़े ज़ख्म की टीस देगया, जो भारत के समक्ष पहले से मौजूद सीमा पार से पनपरहे नापाक आतंकवाद के खतरे की गंभीरता को नए साल की शरुआत में ही नए सिरे से रेखांकित कररहा है. .