बिहार विधान सभा चुनाओ -2015 “एक मियान में दो तलवार” के चक्रव्यूह में फंसती भाजपा

महांगठबंधन के अलगाव से गदगद भाजपा , खुद को भी अनचाहे चक्रव्यूह में फंसता महसूस ज़रूर कर रही होगी. चक्रव्यूह की रचना तब हुई जब रामबिलास के रहते हुए राजग ने मांझी को बिहार चुनाओ का खेवनहार समझ लिया . दोनों का बिहार विधानसभा चुनाव में राजग के लिए कहीं न कहीं एक मियान में दो तलवार का होने जैसा ही हैं. भाजपा के गदगद होने की और वजह भी हैं, जैसे मध्यप्रदेश, राजस्थान, और बंगलौर नगरनिगम चुनाव में भाजपा ने जीत की हैट्रिक शानदार ही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक भी रही होगी. ये उत्साह ठीक वैसा ही हैं जैसे लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली विधान सभा चुनाव से पूर्व रहा होगा. लेकिन किरणबेदी के नाम के ऐलान ने ऐसा चक्रव्यूह रचा जिसने भाजपा की की कराइ तैयारी और मंसूबों पर पानी फेर दिया . अब बिहार चुनाव की बारी हैं, इस बार भाजपा की परीक्षा और कड़ी हैं. प्रश्न सिर्फ लालू नितीश की जुगलबंदी से निपटने का नहीं हैं, सवाल तो भाजपे के अपने अंदरुनी रचनाओं से उभरती चिंताओं का हैं.
एक तरफ जैसे जैसे चुनाव तारिख के ऐलान का समय करीब आरहा हैं , उसी प्रकार बग़ावती तेवर भी दो चार हो रहे हैं . जी हाँ बात मांझी की हो रही हैं. उन्हें रामबिलास पासवान का साथ बार बार चुभ रहा हैं, हल ही में मांझी ने कहा की ‘मांझी ने मंगलवार को कहा कि पासवान खुद अपने समुदाय के नेता नहीं हो पाए हैं तो राष्ट्रीय नेता कैसे हो गए ‘. उन्हों ने आगे कहा की ‘रामविलास पासवान किस आधार पर खुद को राष्ट्रीय नेता कहते है. हम उन्हें इंटरनेशनल नेता कहते हैं. दलितों का नेता का सिर्फ दंभ भरते हैं. बीजेपी की जीत में पासवान का कोई योगदान नहीं है, जबकि पासवान खुद नरेंद्र मोदी की बदौलत जीते.’
मांझी ने आगे कहा की – ‘मोदी के बाद मेरे लिए बजी तालियां’
जीतन राम मांझी ने दावा किया जनता उनके साथ है. उन्होंने कहा, ‘मोदी की सभाओं में पासवान से ज्यादा तालियां मुझे मिली. प्रधानमंत्री के बाद मेरे लिए लोगों ने सबसे ज्यादा तालियां बजाईं. पासवान को यह बात समझनी चाहिए.’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गरीबों का मसीहा बताते हुए कहा कि वह लोगों के लिए काम करते हैं.
खास बात ये रही कि मांझी ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री पद का उमीदवार नहीं हूँ. उन्हों ने साथ ही ये भी कहा कि अगर लालू प्रसाद नीतीश को ध्वस्त करें तो वह उनका साथ देने के लिए तैयार हैं. उधर पासवान जी कि तरफ से कोई टिप्पणी न आना संकेत देता हैं कि पासवान जी के एक हाथ में केंद्र का लड्डू पहले से हैं , अब वेट एंड वाच ही ठीक हैं, शायद सब्र का फल दूसरे हाथ में भी राज्य का लड्डू ले आए. लेकिन दोनों कि जुमले बजी भाजपा के माथे पे शिकन ज़रूर छोड़ रही होगी .
अब मांझी – पासवान से अगर भाजपा संतुष्ट हो भी जाए तो फिर व्यापम कि आंच भी ताव देने कि कोशिश करती हैं, यही नहीं ,टिकट बंटवारा, सीट का फैसला, सीएम का दावेदार जैसे फैसले भाजपा कि कठिन परीक्षा लेने के लिए तैयार हैं. उधर कुशवाहा जी भी समय कि चाल पढ़ने में लगे हैं, इन स्थितियों में ऐसी छोटी पार्टी का महत्व भी बढ़ जाता हैं. कल हो न हो ??? ऊंट किस करवट बैठे ???
भाजपा इन सब से बाहर निकलती हैं तो पेयाज़ पीछा छोड़ने को तैयार नहीं हैं. भाजपा को पेयाज़ पर अतीत बार बार याद आता होगा अर्थात सुषमा जी कि दिल्ली सरकार याद होगी. यही नहीं अच्छे दिन के नारे से लेकर जुमलेबाजी तक सभी भाजपा का इम्तेहान लेने को तैयार हैं. बिहार चुनाव में हर जगह भाजपा विरोधी एबीपी न्यूज को दिये अमित शाह के जुमला वाले बयान का टेप बजाकर लोगों को सुना रहे हैं. विरोधियों ने तोमर के अच्छे दिन वाले बयान से पलटने को उसी सीरीज का अगला भाग तक कहा है.