बेबाक जीवनी ‘ एनीथिंग बट खामोश ‘ क्या राजनितिक गलियारों के सवालों को खामोश कर पाएगी ?

               व्यक्ति की उपलब्धियों का आकलन उस सम्मान से किया जासकता है, जो उसे एक तरफ  अपनी बिरादरी से मिलता हो तो दुसरी तरफ अपने समकालीन शख्सियतों से भी वही सम्मान मिल रहा  हो. उपरोक्त बातें अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के लिए कही जारही हैं, इस सम्मान से सम्मानित होने का हक़ भी है उन्हें, तभी तो सामाजिक सुधार के जूनून और जनसेवा की चेतना ने उन्हें बॉलीवुड की आरामदेह ज़िंदगी छोड़ राजनीति के अखाड़े में आखाड़े हुए.
               आज शत्रुघ्न सिन्हा की ज़िंदगी का खास दिन इस लिए है कि उनकी जीवनी किताब की शक्ल लिए ‘ एनीथिंग बट खामोश ‘ का विमोचन होने जारहा है. विमोचन लाल कृष्ण ऐडवाणी के हाथों होना है. खास बात ये है कि आज की विपक्ष कांग्रेस के नेता शशी थरूर को शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रस्तावना लिखने के लिए आमंत्रित किया था.
               शशी थरूर के शब्दों में – ‘ शत्रुघ्न सिन्हा की ज़िंदगी और कैरियर की रोमांचक कहानी पढ़ने वाले का मन मोह लेती हैं, क्योंकि इसमें न सिर्फ हिन्दी फिल्म उद्द्योग का बेबाक वर्णन है बल्कि उतनी ही रोचक राजनितिक जगत की झलक भी ‘.
                अपने व्यक्तित्व में पूरी तरह सुकून महसूस करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा अक्खण विलेन के रूप में शरुआत करने वाले उन चुनिंदा अभिनेता या राजनेता में से हैं जिन्होंने एक नए किस्म का हीरोइज़्म परिचित किया वह चाहे सियासी पर्दा हो या फिर  फ़िल्मी पर्दा. लेकिन पुस्तक का विमोचन आज की राजनीति में क्या रोल अदा करेगा ? कहीं ऐसा न हो कि बिना कंजूसी के शब्दों के इस्तेमाल से रखे गए सारे तथ्य वह चाहे उनके बारे में हों या फिर आज की राजनितिक गलियारों से जुड़े खुलासे, किसी विवाद के जन्म का कारण  बन जाए ? फिर भी  कामना कि इस आनंददायक किताब और भविष्य के उनके द्वारा किये जाने वाले जनसेवा कार्यों के माध्यम से  वे कभी खामोश न हों.