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तलाक…तलाक…तलाक… ?

एक तरफ से आवाज उठती है कि “साफ़ कह दे गिला कोई अगर है फैसला फासले से बेहतर है…..” तो दूसरी तरफ से जवाब भी आता है कि “तलाक दे तो रहे हो गुरूर-ओ-कहर के साथ मेरा शबाब भी लौट दो मेरे महर के साथ…” आधुनिक युग में मुस्लमान जोड़ा गिला, शिकवा के अंतर्द्वंद में […]

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