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समरथ को नहीं दोष गुसाईं !

देश के मौजूदा परिदृश्य में उक्त पंक्ति का अर्थ है मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी . अतः देखिए इस ब्लॉग को और विचार कीजिये की हम हमारा देश कहाँ जारहा है……आखिर विकास क्यों लाकुग्रस्त प्रतीत हो रहा है. स्वयं से प्रश्न कीजिये की हमने वोट किसी भावना में बाह कर […]

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आमिर खान साहब “कुर्बानी की सार्थकता” समझिये…

कई दिनों से देश की भिन्न मीडिया में बकरे की कुर्बानी का ज़िक्र हो रहा है, जिसकी सार्थकता पर बार बार सवाल उठ रहे हैं. अत: इसकी सार्थकता हेतु ३ मुख्य बिन्दुओं पर मैं ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ . १ -: बायोकेमिस्ट्री का मानना है कि हमारे शरीर में २० प्रकार के अमीनो एसिड […]

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