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समरथ को नहीं दोष गुसाईं !

देश के मौजूदा परिदृश्य में उक्त पंक्ति का अर्थ है मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी . अतः देखिए इस ब्लॉग को और विचार कीजिये की हम हमारा देश कहाँ जारहा है……आखिर विकास क्यों लाकुग्रस्त प्रतीत हो रहा है. स्वयं से प्रश्न कीजिये की हमने वोट किसी भावना में बाह कर […]

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बेबाक जीवनी ‘ एनीथिंग बट खामोश ‘ क्या राजनितिक गलियारों के सवालों को खामोश कर पाएगी ?

               व्यक्ति की उपलब्धियों का आकलन उस सम्मान से किया जासकता है, जो उसे एक तरफ  अपनी बिरादरी से मिलता हो तो दुसरी तरफ अपने समकालीन शख्सियतों से भी वही सम्मान मिल रहा  हो. उपरोक्त बातें अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के लिए कही जारही हैं, इस सम्मान […]

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(साल 2015) खत्म होना तो एक शरुआत (नव वर्ष2016) है !

                कहना गलत नहीं होगा कि बीते वर्ष के शब्द पिछले साल की भाषा से जुड़े होते है, जबकि नए वर्ष के शब्दों को नई परिभाषा का इंतज़ार होता है. शायद इसी लिए नया साल शुभकामनाओं और उमीदों के साथ एक नया सफर आरम्भ करता है. लेकिन जितनी […]

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