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समरथ को नहीं दोष गुसाईं !

देश के मौजूदा परिदृश्य में उक्त पंक्ति का अर्थ है मैं चाहे ये करूँ मैं चाहे वो करूँ मेरी मर्ज़ी . अतः देखिए इस ब्लॉग को और विचार कीजिये की हम हमारा देश कहाँ जारहा है……आखिर विकास क्यों लाकुग्रस्त प्रतीत हो रहा है. स्वयं से प्रश्न कीजिये की हमने वोट किसी भावना में बाह कर […]

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आमिर खान साहब “कुर्बानी की सार्थकता” समझिये…

कई दिनों से देश की भिन्न मीडिया में बकरे की कुर्बानी का ज़िक्र हो रहा है, जिसकी सार्थकता पर बार बार सवाल उठ रहे हैं. अत: इसकी सार्थकता हेतु ३ मुख्य बिन्दुओं पर मैं ध्यान केन्द्रित करना चाहता हूँ . १ -: बायोकेमिस्ट्री का मानना है कि हमारे शरीर में २० प्रकार के अमीनो एसिड […]

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ना बापू हैं, ना ही जनता में समझ, ……तो नेताओं का स्वार्थ क्या यूँ ही हिंसा जारी रखेगा ?

जवाब पर जवाब देते रहने की संकल्पना से हिंसा की चिंगारी ज्वालामुखी की ही रचना करती है, तभी तो सब्जरंग से सजा धजा समाज इस कदर भस्म होजाता है किउसकी राख भी खाक हो जाती है , ताकि असामाजिकता की आत्मा को शांत रखने हेतु उस राख को नदी की धरा में प्रवाहित कर समाज […]

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बसपा बहुमत के करीब पहुँचती दिखाई देरही है !

देशवासी बखूबी वाकिफ हैं की 543 लोकसभा सीटों की राजनितिक जमीन हेतु उत्तरप्रदेश की 403 विधान सभा सीटों का महत्त्व आखिर है क्या ? क्या वाकई उत्तरप्रदेश की फतह भविष्य में केंद्र की सत्ता प्राप्त करने हेतु बुनियादी ज़मीन तैयार करती है ? दो राष्ट्रिय पार्टी में कांग्रेस क्यों कई दशक से वजूद की तलाश […]

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UP विधान सभा चुनाव २०१७- साख की जंग हाथी और साइकिल में, पंजा वजूद तो कमल ठौर की तलाश में.

देश बखूबी वाकिफ है कि ५४३ लोकसभा सीटों की राजनीति में ४०३ विधान सभा सीटों का महत्त्व क्या है. जी हाँ ज़िक्र ४०३ विधान सभा सीटों से सजे उत्तरप्रदेश का का किया जारहा है, जिसका प्रभाव हमेशा हमेशा से ५४३ सीटों की मालिक केंद्र सरकार की राजनितिक स्थिरता हेतु उल्लेखनीय रहा है, शायद इसी लिए […]

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आरक्षण हेतु आंदोलन, आंदोलन के लिए बलवा, उचित नहीं, निरर्थक ज़रूर !

                  निर्वाचित सरकार और नेताओं के राज – धर्म की ये कैसी प्रवृत्ति जो हरियाणा की जनता ने झेला है ? क्या राज्य की कार्यपालिका और पुलिस-प्रशासन ने राज्य की दशा हेतु सही दिशा में फ़र्ज़ को अंजाम दिया है ? क्या हालात पर क़ाबू पाने के […]

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न राम की भक्ति होगी, न खुदा की इबादत होगी, क्या ताउम्र इस ज़मीन पर वोटों की सियासत होगी ?

                   बेशक कलराज मिश्रा, साक्षी महाराज, साध्वी प्राची, निरंजना ज्योति, सुब्रमण्यम स्वामी आदि की तुलना में राजनाथ सिंह बीजेपी और मोदी सरकार दोनों में ही कहीं ज़्यादा रसूख़ वाले नेता हैं. उनके द्वारा राम मन्दिर को लेकर दिया गया बयान तकनीकी तौर पर भी सटीक बैठता है. […]

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कठिन है डगर विकास की !

क्या देश को देखने का नजरिया अब भी जाति, धर्म या किसान-मज़दूर में बंटा हुआ है ? सियासी बूटी में ऐसा कौन सा गुण है जो राजनीति को रहत तो देता है लेकिन समाज को सुख नहीं दे पाता, क्यों ? दलित आज तक समाज की मुख्य धारा से क्यों महरूम हैं  ? राजनीति साधने हेतु […]

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प्रभु जो नहीं सुनोगे रेल यात्रियों की पुकार, कैसे होगी आपकी लीला अपरमपार

फिलहाल रेलवे जनता को क़रीब 32 हज़ार करोड़ रुपये की रियायती सेवाएँ मुहैया करवाती है. इसमें से क़रीब 22 हज़ार करोड़ रुपये का घाटा सामान्य दर्ज़े और उप-नगरीय सेवाओं की वजह से है. दर्द ये कि एक तरफ़ ये भारी घाटा और दूसरी तरफ़ सातवें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें सिर पर हैं. जो रेलवे पर […]

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शाह की ताजपोशी से किसे मिलेगी शह किसे मिलेगी मात ?

सफलता के वक़्त गैर भी डुगडुगी बजाने लगते हैं, तो वहीँ असफलता अपनों के चेहरे भी दुसरी दिशा में मोड़ देती हैं. इन बातों का सबसे अधिक तजुर्बा अमित शाह को है, २०१४ जैसा हनीमून पीरियड भाजपा ने अमित शाह के ‘शह और मात’ से अर्जित किया, लेकिन २०१५ दिल्ली एवं बिहार विधान सभा के […]

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