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क्योंकि रेप अपने आप में ही क्रूरता की सारी हदें पार कर रहा है !

सभ्य समाज से प्रश्न है कि रेप या यौन हिंसा आखिर है क्या ? क्या ये समाज की जननी अर्थात स्त्री पर हावी होने की प्रवृत्ति मात्र है ? या फिर पुरुष का खुद के बड़ा, असरदार होने का अक्षम्य दंभ ? या फिर औरत को संपत्ति समझने की भूल ? आखिर कैसे हमारा कानून […]

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दलित राजनीति अभी जारी है !

पिछले १ महीने से उत्तरप्रदेश का सहारनपुर का अमन-चैन दो समुदायों एवं जातीय संघर्ष का शिकार बना हुआ है. २० अप्रैल को सांसद राघव लखन पाल के नेतृत्व में भाजपा समर्थकों की रैली मुस्लिम बहुल क्षेत्र में निकलती है और देखते ही देखते राघव समर्थक और मुस्लिम समुदाय के बीच झड़प होजाती है. तो दूसरी […]

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तलाक…तलाक…तलाक… ?

एक तरफ से आवाज उठती है कि “साफ़ कह दे गिला कोई अगर है फैसला फासले से बेहतर है…..” तो दूसरी तरफ से जवाब भी आता है कि “तलाक दे तो रहे हो गुरूर-ओ-कहर के साथ मेरा शबाब भी लौट दो मेरे महर के साथ…” आधुनिक युग में मुस्लमान जोड़ा गिला, शिकवा के अंतर्द्वंद में […]

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गांधीजी, तो अब ! ऐसा देश है मेरा ?

             देश की राजधानी दिल्ली का जाएज़ लीजिये, सड़क कम गाड़ियां ज्यादा, कंक्रीट की सड़कों पर गाड़ियों का जंगल बेहयाई से उगा जा रहा है. अगर आप इस हुजूम में फंस गये तो क्या रात क्या दिन, ज़िंदगी बसर सड़क पर ही होती प्रतीत हो रही है, या फिर लाखो […]

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क्यों? सिस्टम भ्रष्ट नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के लिये ही सिस्टम है ?

       याद कीजिये भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना आंदोलन को और सोचिये क्या वाकई राजनीति में पहुँच बनाते हुए सत्ता हासिल कर क्या सिस्टम बदला जा सकता है. क्योकि दिल्ली में लोकपाल के सवाल को हाशिये पर रख कर, दिल्ली के ही दस विधायक ऐसे जो सत्ता पाने के बरस भर के भीतर दागी […]

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आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद की बढ़ती ज़मीन पे सुलगता देश

        गुजरे16 बरस में केन्द्र की सत्ता 360 डिग्री कोण से घूम कर बीजेपी के पास आ चुकी है। बावजूद इसके कश्मीर, नार्थ ईस्ट और मध्य भारत जहाँ आतंकवाद, उग्रवाद एवम नक्सलवाद ने घुसपैठ करते हुए लगभग अपनी ज़मीन बना ली है. यानी तीनो जगहों में लगातार हो रही हिंसा के मद्देनजर […]

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कश्मीर की हरियाली को निगलती लालचौक की लाली

     कश्मीर के आतंकी बुरहान के एनकाउंटर पर घाटी सुलग रही है. 34 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और पंद्रह सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं श्रीनगर में पांचवें दिन कर्फ्यू जारी है. कर्फ्यू की वजह से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. जो कुछ भी घटा […]

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शाह की ताजपोशी से किसे मिलेगी शह किसे मिलेगी मात ?

सफलता के वक़्त गैर भी डुगडुगी बजाने लगते हैं, तो वहीँ असफलता अपनों के चेहरे भी दुसरी दिशा में मोड़ देती हैं. इन बातों का सबसे अधिक तजुर्बा अमित शाह को है, २०१४ जैसा हनीमून पीरियड भाजपा ने अमित शाह के ‘शह और मात’ से अर्जित किया, लेकिन २०१५ दिल्ली एवं बिहार विधान सभा के […]

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फसल किसी ने लगाई, उजाड़ा किसी और ने, भुगतभोगी जनता बनी, आखिर क्यों ?

                             ऊपजाऊ खेतों से हट कर रास्ते से पहले की बंजर ज़मीन पर ज़मींदार साहब की नज़र तब भी नहीं पड़ती थी जब वह घोड़े पर सवार धुल उड़ाते प्रतिदिन अपने खेतों की सैर करते हैं। इस बात का इल्म होते ही […]

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