info@msalam.biz

Blog

आतंकवाद, उग्रवाद और नक्सलवाद की बढ़ती ज़मीन पे सुलगता देश

        गुजरे16 बरस में केन्द्र की सत्ता 360 डिग्री कोण से घूम कर बीजेपी के पास आ चुकी है। बावजूद इसके कश्मीर, नार्थ ईस्ट और मध्य भारत जहाँ आतंकवाद, उग्रवाद एवम नक्सलवाद ने घुसपैठ करते हुए लगभग अपनी ज़मीन बना ली है. यानी तीनो जगहों में लगातार हो रही हिंसा के मद्देनजर […]

Read More »

कश्मीर की हरियाली को निगलती लालचौक की लाली

     कश्मीर के आतंकी बुरहान के एनकाउंटर पर घाटी सुलग रही है. 34 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और पंद्रह सौ से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं श्रीनगर में पांचवें दिन कर्फ्यू जारी है. कर्फ्यू की वजह से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. जो कुछ भी घटा […]

Read More »

आरक्षण हेतु आंदोलन, आंदोलन के लिए बलवा, उचित नहीं, निरर्थक ज़रूर !

                  निर्वाचित सरकार और नेताओं के राज – धर्म की ये कैसी प्रवृत्ति जो हरियाणा की जनता ने झेला है ? क्या राज्य की कार्यपालिका और पुलिस-प्रशासन ने राज्य की दशा हेतु सही दिशा में फ़र्ज़ को अंजाम दिया है ? क्या हालात पर क़ाबू पाने के […]

Read More »

न राम की भक्ति होगी, न खुदा की इबादत होगी, क्या ताउम्र इस ज़मीन पर वोटों की सियासत होगी ?

                   बेशक कलराज मिश्रा, साक्षी महाराज, साध्वी प्राची, निरंजना ज्योति, सुब्रमण्यम स्वामी आदि की तुलना में राजनाथ सिंह बीजेपी और मोदी सरकार दोनों में ही कहीं ज़्यादा रसूख़ वाले नेता हैं. उनके द्वारा राम मन्दिर को लेकर दिया गया बयान तकनीकी तौर पर भी सटीक बैठता है. […]

Read More »

कठिन है डगर विकास की !

क्या देश को देखने का नजरिया अब भी जाति, धर्म या किसान-मज़दूर में बंटा हुआ है ? सियासी बूटी में ऐसा कौन सा गुण है जो राजनीति को रहत तो देता है लेकिन समाज को सुख नहीं दे पाता, क्यों ? दलित आज तक समाज की मुख्य धारा से क्यों महरूम हैं  ? राजनीति साधने हेतु […]

Read More »

प्रभु जो नहीं सुनोगे रेल यात्रियों की पुकार, कैसे होगी आपकी लीला अपरमपार

फिलहाल रेलवे जनता को क़रीब 32 हज़ार करोड़ रुपये की रियायती सेवाएँ मुहैया करवाती है. इसमें से क़रीब 22 हज़ार करोड़ रुपये का घाटा सामान्य दर्ज़े और उप-नगरीय सेवाओं की वजह से है. दर्द ये कि एक तरफ़ ये भारी घाटा और दूसरी तरफ़ सातवें वेतन आयोग की सिफ़ारिशें सिर पर हैं. जो रेलवे पर […]

Read More »

शाह की ताजपोशी से किसे मिलेगी शह किसे मिलेगी मात ?

सफलता के वक़्त गैर भी डुगडुगी बजाने लगते हैं, तो वहीँ असफलता अपनों के चेहरे भी दुसरी दिशा में मोड़ देती हैं. इन बातों का सबसे अधिक तजुर्बा अमित शाह को है, २०१४ जैसा हनीमून पीरियड भाजपा ने अमित शाह के ‘शह और मात’ से अर्जित किया, लेकिन २०१५ दिल्ली एवं बिहार विधान सभा के […]

Read More »

पाकिस्तानी कार्रवाई कितनी हकीकत कितना फ़साना ???

याद कीजिये, बैंकॉक में भारत-पाक सुरक्षा सलाहकार मिलते हैं अमेरिका से तारीफ मिलती है. हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ‘हार्ट ऑफ़ एशिया’ सम्मलेन हेतु इस्लामाबाद जाती हैं, अमेरिका की तरफ से वेलकम होता है. प्रधानमंत्री अचानक लाहौर उतरते हैं, अमेरिकी विदेश मंत्रालय वेलकम में जुट जाता है. कूटनीतिक वेलकम करता अमेरिका आखिर किस उतावलेपन का […]

Read More »

मालदा, पूर्णिया अगर देवबंदी बनाम बरेलवी का परिणाम है, तो वहीँ मुस्लिम वोट बैंक हेतु नकारात्मक राजनीति का हिस्सा भी !

                लोगों के बीच ताज़ा गुस्सा है कि दादरी के अख़लाक काँड को लेकर मर्माहत हुए लोगों को अब माल्दा और पूर्णिया के मुसलमानों की असहिष्णुता क्यों नहीं दिख रही? समाज की दुर्दशा पर, बढ़ती असहनशीलता पर, तुष्टिकरण और वोट बैंक की सियासत पर, अब संवेदनशील लोगों का […]

Read More »

बेबाक जीवनी ‘ एनीथिंग बट खामोश ‘ क्या राजनितिक गलियारों के सवालों को खामोश कर पाएगी ?

               व्यक्ति की उपलब्धियों का आकलन उस सम्मान से किया जासकता है, जो उसे एक तरफ  अपनी बिरादरी से मिलता हो तो दुसरी तरफ अपने समकालीन शख्सियतों से भी वही सम्मान मिल रहा  हो. उपरोक्त बातें अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा के लिए कही जारही हैं, इस सम्मान […]

Read More »